
हार उपहार और अन्य कहानियाँ | Haar Uphaar aur Anya Kahaniyan
byAjay Jugran
About the Book
अजेय जुगरान की कहानियाँ प्रेम, सामाजिक संबंधों और मानवीय संवेदनाओं को बड़ी सुंदरता से चित्रित करती हैं। शुद्ध और प्रभावी भाषा में लिखी उनकी रचनाएँ दिल को छूने वाली हैं और संवेदनशील पाठकों को अवश्य पसंद आएँगी।
— दिव्या माथुर जी, वरिष्ठ साहित्यकार, लंदन,यूनाइटेड किंगडम
“हार उपहार” उन छोटे-छोटे जीवन-अभिलेखों का कहानी-संग्रह है, जिनमें घर, पहाड़, स्मृति, रिश्ते और बदलता समाज साथ-साथ दर्ज होते हैं। अजेय जुगरान साधारण मनुष्यों के सुख-दुःख में हमारे समय की सांस्कृतिक धड़कन सुनते हैं। उनकी कहानियाँ जीवन की विडंबनाओं को करुणा, विनोद और मानवीय ऊष्मा के साथ पाठक तक पहुँचाती हैं।
— प्रोफेसर डॉ. मानवी सेठ, प्रो वाईस चांसलर, भारतीय धरोहर संस्थान, नई दिल्ली, भारत
अजेय जी की कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी आत्मीयता है। गंभीर सामाजिक विषयों पर लिखते हुए भी वे प्रेम, करुणा, व्यंग्य और मानवीयता के सहारे जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखते हैं।
— डॉ. यूरी बोटविंकिन, लेखक-कवि, कीव, यूक्रेन
“हार उपहार” की कहानियाँ दृश्य-सरीखी जीवंत हैं। घरों, पहाड़ों, सड़कों और रिश्तों से निकले इनके पात्र हास्य, पीड़ा, जिजीविषा और करुणा के साथ देर तक पाठक के मन में बसे रहते हैं। हिंदी साहित्य जगत को इस सुंदर भेंट के लिए अजेय जी को शुभकामनाओं सहित धन्यवाद।
— तरुण खिवाल, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दृश्य कलाकार,नई दिल्ली,भारत
जुगरान जी की कहानियाँ भीतर से महसूस की हुई लगती हैं। इनमें अपनापन है, मिठास है, दर्द है और कहीं-कहीं, हल्की-सी मुस्कान भी। यह संग्रह बताता है कि आम लोगों की साधारण ज़िंदगियों में भी असाधारण कहानियाँ छिपी होती हैं।
— अक्षत घिल्डियाल, हिंदी फ़िल्मों के लेखक, मुंबई, भारत
— दिव्या माथुर जी, वरिष्ठ साहित्यकार, लंदन,यूनाइटेड किंगडम
“हार उपहार” उन छोटे-छोटे जीवन-अभिलेखों का कहानी-संग्रह है, जिनमें घर, पहाड़, स्मृति, रिश्ते और बदलता समाज साथ-साथ दर्ज होते हैं। अजेय जुगरान साधारण मनुष्यों के सुख-दुःख में हमारे समय की सांस्कृतिक धड़कन सुनते हैं। उनकी कहानियाँ जीवन की विडंबनाओं को करुणा, विनोद और मानवीय ऊष्मा के साथ पाठक तक पहुँचाती हैं।
— प्रोफेसर डॉ. मानवी सेठ, प्रो वाईस चांसलर, भारतीय धरोहर संस्थान, नई दिल्ली, भारत
अजेय जी की कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी आत्मीयता है। गंभीर सामाजिक विषयों पर लिखते हुए भी वे प्रेम, करुणा, व्यंग्य और मानवीयता के सहारे जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखते हैं।
— डॉ. यूरी बोटविंकिन, लेखक-कवि, कीव, यूक्रेन
“हार उपहार” की कहानियाँ दृश्य-सरीखी जीवंत हैं। घरों, पहाड़ों, सड़कों और रिश्तों से निकले इनके पात्र हास्य, पीड़ा, जिजीविषा और करुणा के साथ देर तक पाठक के मन में बसे रहते हैं। हिंदी साहित्य जगत को इस सुंदर भेंट के लिए अजेय जी को शुभकामनाओं सहित धन्यवाद।
— तरुण खिवाल, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दृश्य कलाकार,नई दिल्ली,भारत
जुगरान जी की कहानियाँ भीतर से महसूस की हुई लगती हैं। इनमें अपनापन है, मिठास है, दर्द है और कहीं-कहीं, हल्की-सी मुस्कान भी। यह संग्रह बताता है कि आम लोगों की साधारण ज़िंदगियों में भी असाधारण कहानियाँ छिपी होती हैं।
— अक्षत घिल्डियाल, हिंदी फ़िल्मों के लेखक, मुंबई, भारत
